दोस्तों नमस्कार जो इजराइल के प्रधानमंत्री नेतानू ने कहा जो अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा इन दोनों ने अपनी सफलता के तार जहांजहां जोड़े संयोग से दोनों देशों की खुफिया एजेंसीज की रिपोर्ट इसके खिलाफ है। वो मोसाद हो या सीआईए हो। दोनों यह मानकर चल रहे हैं कि दरअसल परिस्थितियां इतनी नाजुक हो चली है जहां पर अभी तक जो सफलता का पैमाना इजराइल दिखला रहा था या अमेरिका या वाइट हाउस लगातार जिन बातों का ऐलान कर रहा था उसकी कोई अपनी जमीन है ही नहीं।

खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट
सीआईए की रिपोर्ट खुले तौर पर कहती है बंकरों में अभी भी बैलेस्टिक मिसाइल भरे पड़े हैं। ड्रोन भरे पड़े हैं। मोसाद दूसरी तरफ यह कहने से नहीं चूकता है कि जिस तरीके से अमेरिका और इजराइल की धाक आसमान में इस तरीके से थी कि कोई उसे भेद नहीं पा सकता था। लेकिन सात लड़ाकू विमान इस दौर में अमेरिका के निशाने पर ईरान ने ले ही लिए। और यह सवाल वाकई बड़ा हो गया।
ईरान की सैन्य ताकत पर सवाल
क्या इस तरीके से ईरान के पास वो तमाम उन्नत हथियार मौजूद हैं या वह उन्नत हथियार चीन और रशिया के जरिए निकल कर सामने आए हैं। यह सवाल कोई छोटा इसलिए नहीं है क्योंकि अभी तक इन्हीं बातों का जिक्र था कि चीन बाखूबी मदद कर रहा है। लेकिन पहली बार यह भी सवाल आया कि S500 जो कि रशियन मिसाइल है।
रूस की मिसाइल S500 पर चर्चा
क्या युद्ध से पहले उसे ईरान पहुंचा दी गई थी या फिर युद्ध के बीच में रशिया ने यह मिसाइल ईरान को दे डाली है तो किस रास्ते से कहां यह मिसाइल कैसे पहुंच गई यह इजराइल के लिए एक बड़ा सवाल है या मोसाद के अपने ब्लूप्रिंट में इसकी कोई जगह इससे पहले बनाई नहीं गई थी लेकिन पहली बार जब इजराइल के मीडिया ने यह बताना शुरू कर दिया कि जो लड़ाकू विमानों को भेदा जा रहा है।
अमेरिकी विमानों पर खतरा
उसके पीछे रशिया की वह मिसाइल है जो कि पिछले ही साल ऑपरेशनल हुई और यह अमेरिकी F2 हो, F35 हो या B21 हो उसको निशाने पर ले पाने में यह सक्षम है। यानी रूस की इस एडवांस नेक्स्ट जनरेशन सरफेस टू एयर या एंटीबलेस्टिक मिसाइल सिस्टम जो है यह तकरीबन 500 से 600 किलोमीटर तक इंटरसेप्शन रेंज को घेर लेता है।
एडवांस टेक्नोलॉजी और युद्ध
हाइपरसोनिक वेपन के तौर पर स्टिल्थ एयरक्राफ्ट और सेटेलाइट के जरिए यह मार करता है। क्या इसकी जानकारी वाकई नहीं थी? और इस स्थिति में जब आसमान में अपनी धाक अमेरिका लगातार जताते चले जा रहा था तो वह सब कुछ खारिज हो गया। यह रिपोर्ट इजराइल के भीतर की है कि हां रूसी मिसाइलों ने ही यह पूरा काम किया है।
युद्ध की असल स्थिति
लेकिन बात सिर्फ इतनी है नहीं। सवाल तो यह है पहली बार इंटेलिजेंस की रिपोर्ट वो सीआईए की ही रिपोर्ट क्या ना हो। एक मैसेज यह दे दिया गया कि अभी तक जिन हथियारों के आश्रय ईरान ताकत को दिखलाता था अमेरिका की शायद यह भूल हो गई कि उसने एक ऐसा हथियार उसके हाथ में दे डाला जो होमज रूट है उसके जरिए उसकी ताकत अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक अंतरराष्ट्रीय ताकतवर देश के तौर पर हो गई।
यूरोप और खाड़ी देशों की रणनीति
और इसी का असर है कि फ्रांस खाड़ी देशों के साथ कोई सेटेलाइटिक व्यू में कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। इसी का असर है कि पूरे यूरोप के भीतर अमेरिकी मिलिट्री जहाजों को आवाजाही से रोका गया है। यही वजह है कि इन सबके बीच स्टैमर पूरे यूरोप को एकजुट कर रहे हैं।
यूरोपीय यूनियन और नई दिशा
और यूरोपीय यूनियन के साथ सिर्फ युद्ध के मद्देनजर नहीं बल्कि आने वाले वक्त में इकोनमी और सिक्योरिटी दोनों के लिहाज से समझौता करने की दिशा में बढ़ना चाह रहे हैं और इन सबके बीच मिलोनी यानी इटली की प्राइम मिनिस्टर मिलोनी सऊदी अरब पहुंच गई और खाड़ी के दूसरे देशों के साथ संवाद बना रही है।
सऊदी अरब और बदलते समीकरण
यह कहते हुए कि दरअसल जिस सुरक्षा के आश्रय वो अमेरिका पर निर्भर थे, अब उसको यूरोपियन देशों के साथ उन्हें जोड़ना होगा। यानी इटली के हथियार भी अब आपको सऊदी अरब में नजर आ सकते हैं।
युद्ध के मैदान की ताज़ा स्थिति
दरअसल यह सिर्फ एक छोटा सा सिरा है जो इस वक्त पूरी अमेरिका को या बजामिन नेतानों को परेशान कर रहा है और उसमें पहली तस्वीर रशिया के उन मिसाइलों की देख लीजिए। जो पहली बार इजराइल ने माना हां रूसी मिसाइलों के जरिए ही इस तरीके से ईरान आसमान में युद्धक विमानों को भेज सकता है।
अमेरिकी जेट और हेलीकॉप्टर पर हमला
ध्यान दीजिए तो बीते 24 घंटों में दो अमेरिकी जेट्स गिराए गए। दो रेस्क्यू हेलीकॉप्टर पर अटैक किया गया। सीएच47 चिनुक हेलीकॉप्टर का मलवा ईरान की जमीन पर दिखाई दिया और आईआरजीसी ने उसे बकायदा तस्वीरों में खींचकर दुनिया के सामने जारी कर दिया।
ड्रोन बनाम महंगे हथियार
महत्वपूर्ण यह नहीं है कि इस तरीके से यह युद्ध अमेरिका के हाथ से निकल रहा है या युद्ध लंबा चल रहा है। सवाल यह है कि ड्रोन की कीमत हेलीकॉप्टर के पहियों की कीमत से भी कम है और यह अमेरिकी युद्ध शैली को पूरे तरीके से खत्म कर रही है।
ईरान की रणनीति और लागत
यानी ईरान के जो तरीके हैं उसमें ईरानी शायद ड्रोन उसकी कीमत 20,000 से $00 तक होती है। लेकिन दूसरी तरफ जो पेट्रियोटिक पीसी3 इंटरसेप्टर है वह तकरीबन 4 से 50 लाख डॉलर की कीमत का होता है।
गोरिल्ला युद्ध रणनीति
युद्ध की यह परिस्थिति दरअसल उस गोरिल्ला युद्ध की दिशा में ले जाती है जहां पर जो कमजोर होता है वह निशाना उसी समय साधता है जब वह असरकार हो।
होर्मुज रूट का महत्व
क्या? यह सवाल अब इसलिए बड़ा हो चला है क्योंकि होमर्ज रोड सबसे बड़े हथियार के तौर पर है।
वैश्विक तेल सप्लाई पर असर
दरअसल यह मैसेज है कि होमोज रूट से हर दिन 14.22 मिलियन बैरल पर डे जो निकलता था उसका व्यापक असर एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा है।
तीन बड़े सवाल
पहला सवाल तो जिस सीआईए के पूर्व डायरेक्टर बंस ने कहा पहली बार परमाणु हथियार से ज्यादा बड़ी ताकत होमर्जर रूट की है इसको ईरान समझ चुका है तो वो कैसे समझौता करेगा।
दूसरी बात जो अंतरराष्ट्रीय गुबान या ताकत अमेरिका और इजराइल को था कि दरअसल हवाई में यानी हवा में उसके लड़ाकू विमानों को भेद पाने में कोई सक्षम नहीं होगा।
तीसरा सवाल है इस दौर में बनते हुए वो नए-नए अलाइनमेंट जो मैसेज दे रहे हैं कि अब अमेरिका के काउंटर में यूरोप एक साथ जुटकर एक नई ताकत के साथ खड़ा हो सकता है।
यह तीन सवाल वाइट हाउस की धड़कनों को तो बढ़ा ही चुके हैं। और तेहरान की यह ताकत बन चुके हैं। बहुत-बहुत शुक्रिया। बहुत-बहुत शुक्रिया।
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